30 हजार स्वर्गवासी, 5 करोड़ के देनदार

 बिजली विभाग के बकाएदारों की फेहरिस्त में स्वर्गवासियों के भी नाम हैं, जिनके नाम पर बकाया बिल वसूल पाना अधिकारियों के लिए बड़ा चैलेंज बन गया है। बिल का तकादा करने बिजली कर्मचारी कनेक्शन होल्डर्स के घर जाते हैं तो बेटों का जवाब मिलता है, जिसके नाम से कनेक्शन है उससे मांगों बकाया बिल। हालांकि, ऐसे जवाबों से हैरान- परेशान बिजली अधिकारी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं.

30 हजार से अधिक

शहर में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 2 लाख के करीब है। लेकिन, इनमें से 30 हजार से भी अधिक लोग ऐसे हैं, जिनकी मौत वर्षो पहले हो चुकी है। लेकिन, विभाग इनके नाम से आज भी बिजली का बिल जारी हो रहा हैं। कनेक्शन होल्डर्स के वारिसान ने भी विभाग को डेथ की इंफॉर्मेशन नहीं दी और अब बिल भी नहीं जमा कर रहे हैं।

विभाग के लटके पड़े हैं बिल

पारिवारिक तनातनी में बिजली विभाग के लाखों रुपए बिजली बिल के फंसे पड़े हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 5 करोड़ रुपए ऐसे लोगों के नाम बकाया है जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन, उनके फेमिली मेंबर्स इन बिलों का भुगतान करना उचित नहीं समझ रहे है। बिलों का भुगतान नहीं होने से विभाग भी परेशान है। हालांकि, विभाग के पास यह हक होता है कि वह संबंधित घर का बिजली कनेक्शन काट दें। जब तक कोई आगे आकर यह न कहे कि उनके नाम से कनेक्शन कर दिया जाए और बिल भी वही जमा करेगा।

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घूसखोर कैशियर को चार साल की सजा

हरिद्वार जिले के खानपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक में एक व्यक्ति को किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने के एवज में पंद्रह सौ रुपए की घूस लेने के आरोप में प्रभारी कैशियर को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार को चार साल की सजा और क्भ् हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। मामला 7 साल पहले का है। अभियोजन की तरफ से कुल क्0 गवाह पेश किए गए।

7 साल पहले का है मामला

जानकारी के अनुसार लक्सर के बादशाहपुर (खानपुर) निवासी शोपाल ने ख्009 में अपनी पत्नी रुकमणी देवी के नाम पीएनबी खानपुर शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई किया था। इस दौरान बैंक के कैशियर मनोहर सिंह रावत ने कार्ड देने से इनकार कर दिया। कई दिन चक्कर काटने के बाद प्रभारी कैशियर ने पंद्रह सौ रुपये मांगे। जिसकी शिकायत उन्होंने सीबीआई से की। मामले में सीबीआई ने आरोपी मनोहर सिंह रावत निवासी सुभाषनगर रुड़की को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। पिछले सात साल से सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में मामला चल रहा था। मंगलवार को सीबीआई की तरफ से वकील ने क्0 गवाहों को पेश किया। कोर्ट ने कैशियर को चार साल की सजा सुनाई है।

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मायके जाना हो या ससुराल, कर दें आवेदन

 तीन साल बाद आखिरकार शिक्षकों की दूसरे जनपद में तबादले की प्रक्रिया मंगलवार को शुरू हो गई। ट्रांसफर के इच्छुक टीचर्स को तबादले के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा। तबादले के लिए पांच जिलों का विकल्प देना होगा। इसमें भी राजधानी समेत कुल चार जिलों को विकल्प में शामिल नहीं दिया जा सकेगा। मंगलवार को प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आनलाइन आवेदन करने वालों में होड़ लग गई। सुबह के वक्त प्रेशर के चलते सर्वर झेलाने लगा। कुछ का पूरा दिन डिटेल जुटाने में ही निकल गया.

12 जुलाई की शाम तक होंगे आवेदन

पांच जुलाई से शुरू हुई आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया मंगलवार 12 जुलाई की शाम पांच बजे तक चलेगी। इसके बाद कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। आनलाइन आवेदन करने वाले शिक्षकों को अपनी सैलरी की पूरी डिटेल, नियुक्ति की डिटेल, प्रमोशन की स्टेटस और पैनकार्ड की डिटेल आनलाइन फिल करनी है। इसके साथ उन्हें पांच जिलों का विकल्प भी देना होगा। अन्तरजनपदीय तबादले के लिए वही शिक्षक अर्ह होंगे जिन्होंने 31 मार्च 2016 को नियुक्ति के तीन साल पूरे कर लिए होंगे। आनलाइन आवेदन सिर्फ एक बार भरा जा सकेगा। इसके बाद आवेदक दूसरा फॉर्म नहीं भर सकेगा। पूर्ण रूप से भरे गए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट लेकर अभ्यर्थियों को बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में जमा करना होगा.

चार जिलों में नो रूम

तबादला चाहने वाले उन शिक्षकों को इस प्रक्रिया से कोई लाभ नहीं मिलने वाला है जो राजधानी लखनऊ के अलावा कानपुर, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद तबादला चाहते थे। इन जिलों में टीचर्स की संख्या आलरेडी जरूरत से ज्यादा है इसलिए इन जिलों को ट्रांसफर आवेदन के लिए खोला ही नहीं गया है। इन जिलों में तैनाती की इच्छा रखने वाले टीचर्स को नेक्स्ट टाइम प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करना होगा। बता दें कि बहुत से टीचर्स ऐसे हैं जो राजधानी या उसके आसपास के जिले में तैनाती चाहते थे। उनके लिए दरवाजे पहले से ही बंद कर दिए गए हैं.

नए जिले में हो जाएंगे सबसे जूनियर

तबादला नीति के अनुसार मूल तैनाती जिले से ट्राफसर लेने वाला शिक्षक नए तैनाती स्थान पर सबसे जूनियर माना जाएगा। उसकी वरिष्ठता चली जाएगी। इससे सबसे ज्यादा नुकसान उन टीचर्स का होगा जो अपने मूल जिले में प्रमोशन पाने वालों की लिस्ट में हैं। तबादला होने के बाद उन्हें उसी पोस्ट पर ज्वाइन करना होगा जिस पद पर वे आवेदन करने के लिए तैनात थे। इससे उनके वेतन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन प्रमोशन के लिए ट्रांसफर के जिले में प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। वर्ष 2012 में इसी तबादला नीति के आधार पर स्थानान्तरित होने वाले शिक्षक इसे लेकर विरोध दर्ज करा चुके हैं लेकिन उनकी स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ा। इस बार भी तबादला नीति में पहले से ही स्पष्ट कर दिया गया है ट्रांसफर वाले जिले में वह सबसे जूनियर माने जाएंगे.

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युवक के गायब होने पर थाने पहुंचे बजरंगी

थाना जगदीशपुरा क्षेत्र एक युवक के गायब हो जाने पर परिजनों ने गैर समुदाय युवक पर आरोप लगाया है। मामले को लेकर बजरंग दल के लोग थाना जगदीशपुरा गए थे। यहां से उन्हें पुलिस चौकी पहुंच गए। यहां पर कार्यकर्ताओं की पुलिस से हॉट टॉक हो गई। मामले में मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई है। बजरंगियों की भीड़ बोदला पुलिस चौकी पहुंच गई.

पत्थरों पर डिजायन का करता था काम

अमरपुरा निवासी 21 वर्षीय चेतन घर में ही पत्थरों पर डिजायन करने का काम करता था। यह इनका फैमिली बिजनिश है। घर में मां लीलावती बड़ा भाई नितिन व दो बहने साथ में काम करते हैं। चेतन सोमवार की रात से घर से गायब है। परिजनों ने एक आजमपाड़ा के गैर समुदाय युवक पर उसे गायब करने का आरोप लगाया है.

दिन में की थी मारपीट

परिजनों के मुताबिक गैर समुदाय युवक ने सोमवार की सुबह चेतन के साथ मारपीट की थी। युवक उससे पांच हजार की चौथ मांग रहा था। उसने चौथ देने से मना कर दिया। आरोप है कि रात में गैर समुदाय युवक चेतन के घर पहुंचा और गाली- गलौज की साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी.

रात में हो गया गायब

परिजनों ने बताया कि चेतन रात से ही गायब है। परिजनों ने उसकी तलाश की लेकिन उसका पता नहीं चला सका। जानकारी होने पर बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। बजरंगियों ने इस मामले को लेकर थाने पर पुलिस से कार्रवाई की मांग रखी। मंगलवार की रात थाने में मामले को लेकर तहरीर दी गई। परिजनों को आशंका है कि बेटा दबंग युवक के कब्जे में है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। गायब युवक भी बजरंग दल का कार्यकर्ता बताया गया है। थाना प्रभारी तेज बहादुर सिंह के मुताबिक आपसी विवाद है। मामले की छानबीन की जा रही है.

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ईद में शहर का यातायात रहेगा डायवर्ट

ईद के अवसर पर ट्रैफिक विभाग ने शहर के निम्न प्रकार के यातायात प्रतिबंध व डायवर्जन सुबह 8 बजे से प्रारंभ ईद की नमाज समाप्ति के एक घंटे बाद तक लागू करने का निर्णय लिया है।

– कर्नलगंज चौराहे से स्लाटर हाउस बकरमंडी चौराहे की ओर जाने वाले वाहन कर्नलगंज चौराहा, विवेक टाकीज व मैकरावर्टगंज ढाल की तरफ जा सकेंगे.

– बकरमंडी चौराहा से कोई भी वाहन ईदगाह की ओर नहीं जा सकेगा.

– परेड से होकर कोई भी वाहन लकडमंड़ी रोड से मकरमंडी की ओर नहीं जा सकेगा। जिन वाहनों को माल रोड जाना है। वह लाल इमली से मालरोड जा सकेगा.

– लाल इमली चौराहे से कोई भी वाहन साइकिल मार्केट की तरफ नहीं जा सकेगा.

– जिन वाहनों को जीटी रोड की ओर जाना है। वह माल रोड से नरौना चौराहा से घंटाघर होते कालपी रोड जा सकेगा.

– रूपम टाकीज से कोई भी वाहन नालारोड की तरफ नहीं जाएगा। कार चालक अपनी गाडि़या रूपम टाकीज से हलीम कॉलेज होते हुए सियासत प्रेम से होकर ब्रह्मनगर चौराहे तक ले जा सकेंगे।

– प्रेमनगर चौराहे से पैदल राहगीरों के अतिरिक्त कोई भी वाहन पीरोड सीसामऊ की तरफ नहीं जाएगा।

– जरीब चौकी चौराहे से कोई भी वाहन पी रोड के लिए नहीं जा सकेगा और न ही आ सकेगा.

– ब्रह्मनगर तिराहा से कोई भी वाहन ईदगाह की तरफ नहीं जाएगा। बल्कि आर्यनगर से होकर विवेक टाकीज होते हुए माल रोड पर जाएगा। उनके आने का भी यही मार्ग होगा.

– हर्ष नगर तिराहा से ईदगाह की तरफ न तो कोई वाहन जाएगा और न ही कोई वाहन आएगा।

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नन्हीं उड़नपरी का सपना, ओलम्पियाड हो अपना

 13 साल की संजना पाल का ख्वाब ओलंपिक में सबसे तेज दौड़कर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। वह अपने इस सपने को पूरा करने में पूरी शिद्दत से जुटी है। कम संसाधनों के बीच गांव के चकरोड पर दौड़कर वह सपनों को साकार करने में जुटी हुई है। हौंसलों की उड़ान की बदौलत उसने लास्ट ईयर विशाखापट्टनम में हुई नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पांचवां स्थान हासिल किया था। इस साल अप्रैल में लखनऊ में हुई स्टेट लेवल चैंपियनशिप में उसने ब्रॉन्ज मेडल झटका था।

पिता बेचते हैं चाय

संजय नगर निवासी संजना पाल के पिता जयदेव पाल श्यामगंज में चाय की दुकान लगाते हैं। इसी से वह परिवार का पालन- पोषण करते हैं। संजना ने बताया कि जब वह पढ़ रही थी, तो उड़न परी पीटी ऊषा के बारे में सुना। इसके बाद उसने देश के लिए दौड़ने का मन बनाया। साथ ही रेस में कॅरियर बनाने के बारे में पैरेंट्स को बताया। उन्होंने तो सपोर्ट किया। लेकिन रिश्तेदारों ने लड़की होने के कारण इसका विरोध किया। पैरेंट्स ने रिश्तेदारों के विरोध को दरकिनार करके बेटी का साथ दिया। पिता की आर्थिक तंगी इसमें बाधा बनी, तो कोच साहिबे आलम आगे आए। उन्होंने बगैर फीस के कोचिंग देना शुरू किया। उनकी मेहनत और संजना का त्याग रंग लाया। 5 से 7 सितम्बर 2015 को विशाखापट्टनम में हुई नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 600 मीटर की दौड़ 2 मिनट चार सेकंड में पूरा करके पांचवें नंबर पर रही। वहीं, इसी साल अप्रैल को लखनऊ में हुई यूपी स्टेट एथलेटिक चैंपियनशिप में तीन किमी की दौड़ 15 मिनट 42 सेकंड में पूरा किया। बदायूं में हुई मंडलीय विद्यालीय एथलीट चैंपियनशिप में 200, 400 और 600 मीटर में उसने गोल्ड मेडल जीता। इसके साथ ही उसे व्यक्गित चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त हुआ।

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तारों के कैद से आजाद होगा मोहद्दीपुर

बिजली विभाग मोहद्दीपुर के लोगों को अगले छह माह में राहत देने जा रहा है। छह माह बाद मोहद्दीपुर में एक भी हाई वोल्टेज तार आसमान में नहीं दिखेगा। विभाग इस एरिया के तारों को अंडरग्राउंड करने की तैयारी कर रहा है। खोराबार और शाहपुर सब स्टेशन के तार को अंडरग्राउंड किया जा रहा है, जबकि जीडीए सब स्टेशन पर सप्लाई के लिए जीडीए खुद अंडरग्राउंड का कार्य कर रहा है। इसके अलावा मोहद्दीपुर बस स्टेशन से चार फाटक तक आने वाले 11 हजार वोल्ट की लाइन के कार्य की स्वीकृति मिल चुकी है.

पब्लिक को होगा सबसे अिधक फायदा

मोहद्दीपुर एरिया के अगर सभी हाई वोल्टेज तार अंडरग्राउंड कर दिए जाए तो सबसे अधिक फायदा पब्लिक को होगा। बारिश में जैसे ही आंधी चलती है मोहद्दीपुर मेन सब स्टेशन से बक्शीपुर और तारामंडल सप्लाई करने वाले 33 हजार के तार पर कहीं न कहीं पेड़ गिर जाते हैं और दोनों सब स्टेशन की लाइन बंद हो जाती है। हाल में 18 मई को आई आंधी में पैडलेगंज के पास तार पर पेड़ गिर गया था, जिसके कारण लगभग 24 घंटे तक दोनों सब स्टेशन बंद रहे। वहीं, मोहद्दीपुर से शाहपुर और खोराबार सब स्टेशन को सप्लाई करने वाली लाइन भी अंडरग्राउंड होने जा रही है। अगर यह कार्य पूरा हो गया तो दोनों सब स्टेशन पर मेन सब स्टेशन से बिजली ट्रिप होने की समस्या समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा मोहद्दीपुर के सभी 11 हजार वोल्टे के तार अंडरग्राउंड होने के बाद पूरे मोहद्दीपुर एरिया को फायदा होगा, क्योंकि इन तारों के अंडरग्राउंड हो जाने से हाई वोल्टेज के तार से होने वाले लोकल फॉल्ट तो समाप्त हो ही जाएंगे। यही नहीं कई बार हाई वोल्टेज के तार एलटी लाइन पर गिर जाते हैं, जिससे घरों में हाई वोल्टेज करंट दौड़ जाता है। इस कार्य से पब्लिक की यह प्राब्लम लगभग दूर हो जाएगी।

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एक हफ्ते से 20 गांवों में छाया अंधेरा

सिक्टौर बिजली उपकेंद्र से जुड़े दस गांवों में बीते एक सप्ताह से अंधेरा है। एक सप्ताह पहले महराजगंज के मानीराम टोले में 11000 वोल्ट का तार टूट कर बंसराज और लौटू के छत पर गिर गया था। जिसके बाद से इन गांवों की बिजली बाधित है। बिजली नहीं आने गांव के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव के लोगों के सभी बिजली के उपकरण बंद पड़े हैं। मोबाइल चार्ज कराने के लिए भी भी गांव के लोगों को दूर जाना पड़ रहा है।

टोले के लोग कर रहे विरोध

बिजली विभाग के कर्मचारी महराजगंज के मानीराम टोले में 11000 वोल्ट का तार टूट जोड़ने गए तो गांव के लोग उनका विरोध करने लगे। गांव के लोगों का कहना है बिजली का तार रिहायशी क्षेत्र से नहीं ले जाया जा सकता है। जिस तरह से यह तार टूटकर गिरा उससे गांव तरह की कोई दूसरी घटना घटी तो बड़ा हादसा हो सकता है वहीं बिजली विभाग के लोग उसी रास्ते से तार ले जाने पर आमादा है। शनिवार को तार जोड़ने गए बिजली विभाग के कर्मचारियों को ग्रामीणों के विरोध करने के कारण वापस लौटना पड़ा।

पुलिस से मांगा सहयोग

मानीराम टोले से बिजली का तार खिंचवाने के लिए विभाग के जेई त्रियुगी नारायण सिंह ने थाना गुलरिहा से सहयोग मांगा। थाना प्रभारी गुलरिहा ने सरहरी चौकी को निर्देश दिया। शुक्रवार को फिर पुलिस के साथ बिजली विभाग के कर्मचारी तार जोड़ने जोड़ने गए पर गांव वालों के विरोध पर तार बिना जोड़े टीम को वापस लौटना पड़ा। गांव के लोगो का कहना था कि तार 30 साल पहले गया था तब यहां घर नहीं बने थे। अब कई लोग घर बनवा लिए हैं.  Read more http://inextlive.jagran.com/gorakhpur/

लाल के दामाद के खिलाफ जारी हुआ वारंट

टॉपर्स घोटाला मामले में सास- ससुर के बाद दामाद जी का जेल जाना तय हो गया है। बिहार स्कूल इग्जामिनेशन बोर्ड के पूर्व चेयरमैन लालकेश्वर प्रसाद और पूर्व विधायक उषा सिन्हा के दामाद विवेक रंजन के खिलाफ कोर्ट ने गुरुवार को गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया है। गिरफ्तारी के बाद विवेक को भी अपने सास- ससुर के साथ बेउर जेल में दिन काटने होंगे। इंटरमीडिएट टॉपर्स घोटाला में सास- ससुर के साथ- साथ दामाद विवेक रंजन बराबरी का साझेदार है। भ् मई को कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही विवेक फरार है। रेलवे में इंजीनियर होने के बाद भी विवेक को अधिक रुपए कमाने की भूख थी। इस लिए उसने लालकेश्वर और उषा के साथ मिलकर बोर्ड ऑफिस में खूब धांधली मचाई। फर्जी टॉपर्स पैदा करने से लेकर, कॉपियों के टेंडर और दूसरे कामों में विवेक सबकुछ लाइनअप करता था।

टॉपर्स के पैरेंट्स भी होंगे गिरफ्तार

एसआईटी के लिए गुरुवार का दिन काफी खास रहा है। पहले तो उन्हें लालकेश्वर के दामाद की गिरफ्तारी का वारंट मिला। इसके बाद एसआईटी के हाथ लगा फर्जी टापॅर्स के पैरेंट्स की गिरफ्तारी का वारंट। एसआईटी ने कोर्ट में विवेक के साथ ही करीब आधा दर्जन लोगों की गिरफ्तारी का वारंट जारी करने के लिए अपील कर रखी थी। एसआईटी की अपील पर कोर्ट ने वारंट जारी भी कर दिया। अब आईने की तरह साफ हो चुका है कि फर्जी टॉपर्स के पैरेंट्स गिरफ्तार होंगे और जेल जाएंगे.

विवेक की गिरफ्तारी के लिए जारी है छापेमारी

सास- ससुर को एसआईटी ने यूपी के बनारस से गिरफ्तार किया था। इन्हीं के तरह विवेक की भी यूपी में छिपे होने की सूचना एसआईटी को मिली थी। जिसके बाद वहां छापेमारी की गई थी। लेकिन सोर्स की मानें तो विवेक को वेस्ट बंगाल और झारखंड में भी खंगाला जा रहा है। उसके वेस्ट बंगाल के बॉर्डर एरिया में होने की सूचना एसआईटी को मिली थी। विवेक को पकड़ने के लिए एसआईटी की कई टीमें एक वक्त अलग- अलग शहरों में छापेमारी कर रही हैं.

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लाल के दामाद के खिलाफ जारी हुआ वारंट

विधान सभा चुनाव को लेकर इस बार पार्टी टिकट वितरण में देरी नहीं करेगी। बूथ अध्यक्ष सम्मेलन के माध्यम से अमित शाह यह भी देख रहे हैं कि ग्राउंड पर कौन प्रत्याशी मजबूत है। गुरुवार को हुए बूथ अध्यक्ष सम्मेलन में जब कुछ टिकटार्थियों को कार्यक्रम स्थल पर कुछ न कहने का मौका न मिला तो वे होटल में पहुंच गए। होटल में दावेदारों ने उन्हे टिकट क्यों मिलना चाहिए, इसका गणित राष्ट्रीय अध्यक्ष को समझाया.

चल रहा सर्वे

टिकट वितरण को लेकर अमित शाह ने सीधे तो मीडिया से बात नहीं की। लेकिन सूत्रों के अनुसार एक होटल में वे साफ कर गए कि किस आधार पर टिकट दिया जाएगा। एक बड़े नेता ने ऑफ दी रिकॉर्ड होटल से बाहर आते हुए बताया कि सभी विधान सभा क्षेत्रों में लोकल कंपनी द्वारा सर्वे कराया जा रहा है, जिसमें सिटिंग विधायक और दावेदारों का नाम लेकर कंपनी के सदस्य सर्वे कर रहे हैं। साथ ही क्षेत्र में किसकी क्या छवि है, ये भी साथ के साथ कंप्यूटर में फीड किया जा रहा है। कंप्यूटर में दावेदार रिकॉर्ड देखकर ही टिकट पर मोहर लगाई जाएगी.

सिटिंग पर संकट

सर्वे में जो सिटिंग विधायक क्षेत्र में जनता का काम नहीं कर रहा है या जिसकी छवि खराब है। ऐसे सीटिंग विधायकों के भी टिकट काटे जाएंगे। ये प्रयोग अमित शाह गुजरात में पिछले 20 सालों से करते आ रहे हैं.

पसीना पोछते बाहर निकले

होटल में जहां दावेदारों को क्षेत्र में मेहनत करने के लिए कहा गया, वहीं कुछ सिटिंग विधायकों के पेच भी कसे गए। होटल में सेंट्रली हाई स्पीड ऐसी होने के बावजूद भी कई विधायक पसीना पोछते बाहर निकले। सूत्रों का मानना है कि जिन विधायकों की शिकायत कार्यकर्ताओं ने केन्द्रीय कार्यालय भेजी है। ऐसे सभी विधायकों के पार्टी अध्यक्ष ने जमकर पेच कसे हैं.

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