मायके जाना हो या ससुराल, कर दें आवेदन

 तीन साल बाद आखिरकार शिक्षकों की दूसरे जनपद में तबादले की प्रक्रिया मंगलवार को शुरू हो गई। ट्रांसफर के इच्छुक टीचर्स को तबादले के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा। तबादले के लिए पांच जिलों का विकल्प देना होगा। इसमें भी राजधानी समेत कुल चार जिलों को विकल्प में शामिल नहीं दिया जा सकेगा। मंगलवार को प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आनलाइन आवेदन करने वालों में होड़ लग गई। सुबह के वक्त प्रेशर के चलते सर्वर झेलाने लगा। कुछ का पूरा दिन डिटेल जुटाने में ही निकल गया.

12 जुलाई की शाम तक होंगे आवेदन

पांच जुलाई से शुरू हुई आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया मंगलवार 12 जुलाई की शाम पांच बजे तक चलेगी। इसके बाद कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। आनलाइन आवेदन करने वाले शिक्षकों को अपनी सैलरी की पूरी डिटेल, नियुक्ति की डिटेल, प्रमोशन की स्टेटस और पैनकार्ड की डिटेल आनलाइन फिल करनी है। इसके साथ उन्हें पांच जिलों का विकल्प भी देना होगा। अन्तरजनपदीय तबादले के लिए वही शिक्षक अर्ह होंगे जिन्होंने 31 मार्च 2016 को नियुक्ति के तीन साल पूरे कर लिए होंगे। आनलाइन आवेदन सिर्फ एक बार भरा जा सकेगा। इसके बाद आवेदक दूसरा फॉर्म नहीं भर सकेगा। पूर्ण रूप से भरे गए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट लेकर अभ्यर्थियों को बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में जमा करना होगा.

चार जिलों में नो रूम

तबादला चाहने वाले उन शिक्षकों को इस प्रक्रिया से कोई लाभ नहीं मिलने वाला है जो राजधानी लखनऊ के अलावा कानपुर, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद तबादला चाहते थे। इन जिलों में टीचर्स की संख्या आलरेडी जरूरत से ज्यादा है इसलिए इन जिलों को ट्रांसफर आवेदन के लिए खोला ही नहीं गया है। इन जिलों में तैनाती की इच्छा रखने वाले टीचर्स को नेक्स्ट टाइम प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करना होगा। बता दें कि बहुत से टीचर्स ऐसे हैं जो राजधानी या उसके आसपास के जिले में तैनाती चाहते थे। उनके लिए दरवाजे पहले से ही बंद कर दिए गए हैं.

नए जिले में हो जाएंगे सबसे जूनियर

तबादला नीति के अनुसार मूल तैनाती जिले से ट्राफसर लेने वाला शिक्षक नए तैनाती स्थान पर सबसे जूनियर माना जाएगा। उसकी वरिष्ठता चली जाएगी। इससे सबसे ज्यादा नुकसान उन टीचर्स का होगा जो अपने मूल जिले में प्रमोशन पाने वालों की लिस्ट में हैं। तबादला होने के बाद उन्हें उसी पोस्ट पर ज्वाइन करना होगा जिस पद पर वे आवेदन करने के लिए तैनात थे। इससे उनके वेतन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन प्रमोशन के लिए ट्रांसफर के जिले में प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। वर्ष 2012 में इसी तबादला नीति के आधार पर स्थानान्तरित होने वाले शिक्षक इसे लेकर विरोध दर्ज करा चुके हैं लेकिन उनकी स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ा। इस बार भी तबादला नीति में पहले से ही स्पष्ट कर दिया गया है ट्रांसफर वाले जिले में वह सबसे जूनियर माने जाएंगे.

Source: Inext Live Jagran

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