This context can change your life

जिंदगी में यूं ही सब कुछ नहीं मिल जाता। इसके लिए आपको कर्म करना पड़ता है। कर्म के लिए आपका एक लक्ष्य होना चाहिए, और आपकी मिलनसारिता का गुण जो आपको नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए काफी है। यहां दो ऐसे ही प्रेरक प्रसंग दिए जा रहे हैं जिनके सार को आप जीवन में उतार कर अपने नाम का अर्थ सार्थक कर सकते हैं।

पहला प्रसंग

एक बार जर्मन दार्शनिक ने स्वामी दयानंद से कहा, ‘स्वामी जी, आपका बलिष्ठ शरीर और ओजस्वी मुखमंडल देखकर मैं अत्यंत प्रभावित हूं। क्या मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति के लिए यह संभव है कि आप सशक्त शरीर और तेजयुक्त मुखमंडल प्राप्त हो सकें।’

स्वामी जी बोले, ‘क्यों नहीं, जो व्यक्ति अपने को जैसा बनाना चाहता है, बन सकता है। हर व्यक्ति अपनी कल्पना के अनुरूप ही बनता- बिगड़ता रहता है। तुम्हें सबसे पहले एक लक्ष्य बनाना चाहिए, फिर उसकी पूर्ति के लिए संकल्प करके उसी के अनुसार काम करना चाहिए। एकाग्र मन से किए गए कार्य एक दिन सफलता की मंजिल पर अवश्य लाकर खड़ा करते हैं।’

दूसरा प्रसंग

अमेरिका की यात्रा के दौरान एक व्यक्ति जहाज में स्वामी रामतीर्थ से ज्ञान-ध्यान की चर्चा करता रहता था। जहाज से उतरते सय उसने सामान्य शिष्टाचार से पूछा, ‘आप कहां ठहरेंगे स्वामी जी, समय मिला तो आपसे संपर्क का प्रयत्न करूंगा।’

Source: Rashifal 2015

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s